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	<title>Lok Ujala News</title>
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	<description>Hindi News, Latest Hindi News, हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार, Breaking Hindi News,Lok Ujala News</description>
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	<title>Lok Ujala News</title>
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		<title>सौ साल पुराने कुएं और बावड़ियां आज भी दे रहे गवाही, लेकिन मौजूदा विकास कार्यों की उम्र कितनी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Nov 2026 10:25:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रेटा (दातारामगढ़), पवन पुजारी। राजस्थान में जिला परिषद एवं पंचायत समिति चुनावों को लेकर ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज&#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>रेटा (दातारामगढ़), पवन पुजारी।</p>
<p>राजस्थान में जिला परिषद एवं पंचायत समिति चुनावों को लेकर ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। इसी बीच सीकर जिले की पंचायत समिति दातारामगढ़ की ग्राम पंचायत रेटा में भी चुनावी माहौल देखने को मिल रहा है। यहां जिला परिषद के वार्ड संख्या 18 से इंद्रा चौधरी चुनाव मैदान में हैं। शुरुआती चुनावी माहौल और स्थानीय चर्चाओं के बीच उनका मुकाबला काफी कड़ा नजर आ रहा है। हालांकि, चुनाव का वास्तविक परिणाम मतगणना के बाद ही सामने आएगा।</p>
<p>रेटा में पांच तारीख को ग्रामीण अपने गांव का सरपंच भी चुनेंगे। ऐसे में गांव की राजनीति के साथ-साथ विकास के मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।</p>
<p>पुराने कुएं और बावड़ियां पूछ रहे हैं विकास का हिसाब</p>
<p>रेटा गांव में भ्रमण के दौरान एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। गांव के बीचोंबीच आज भी सैकड़ों वर्ष पुराने कुओं और बावड़ियों के अवशेष दिखाई देते हैं। ये अवशेष उस दौर की निर्माण क्षमता, दूरदर्शिता और सार्वजनिक उपयोग की व्यवस्थाओं की गवाही दे रहे हैं।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आज से सौ-दो सौ साल पहले के निर्माण आज भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं, तो आज के जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों द्वारा करवाए गए विकास कार्य कितने वर्षों तक अपनी पहचान बनाए रखेंगे?</p>
<p>आज के सरपंचों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को इन पुराने निर्माणों से सीख लेने की जरूरत है। विकास केवल उद्घाटन पट्टिका लगाने या कुछ समय तक दिखाई देने वाले निर्माण करवाने का नाम नहीं है। असली विकास वह है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी और यादगार बना रहे।</p>
<p>चुनाव में केवल चेहरे नहीं, काम का भी होना चाहिए मूल्यांकन</p>
<p>ग्राम पंचायत रेटा में सरपंच चुनाव से पहले ग्रामीणों के सामने एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्हें उम्मीदवारों के वादों के साथ उनके काम करने की क्षमता, गांव के प्रति सोच और विकास की प्राथमिकताओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए।</p>
<p>क्योंकि राजनीति में चेहरे बदलते रहते हैं, चुनावी वादे भी बदल जाते हैं, लेकिन गांव की पहचान उसके स्थायी विकास कार्यों से बनती है।</p>
<p>रेटा के पुराने कुएं और बावड़ियां आज भी इतिहास की तरह खड़े हैं। अब सवाल यह है कि क्या आज के जनप्रतिनिधि भी गांव के लिए ऐसा कोई काम छोड़ पाएंगे, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखें?</p>
<p>रेटा की चुनावी हलचल के बीच यह सवाल केवल एक ग्राम पंचायत का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की पूरी व्यवस्था का है।</p>
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		<title>राजस्थान में पंचायती राज चुनाव: ग्राम पंचायतों की बदहाली पर ग्राउंड रिपोर्ट</title>
		<link>https://www.lokujalanews.com/archives/751</link>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Nov 2026 07:47:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#fataramgharmla#bjpsikar#gajnabkumawat]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सरकारी धन से खरीदे कचरा पात्र बेकार पड़े, सफाई व्यवस्था नदारद; ग्रामीणों ने उठाए सवाल जयपुर-सीकर (पवन पुजारी)। राजस्थान में&#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सरकारी धन से खरीदे कचरा पात्र बेकार पड़े, सफाई व्यवस्था नदारद; ग्रामीणों ने उठाए सवाल</p>
<p>जयपुर-सीकर (पवन पुजारी)।</p>
<p>राजस्थान में करीब दो वर्ष के अंतराल के बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हो रहे हैं। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों एवं जिला परिषदों के चुनावी माहौल के बीच दो चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है। वहीं, तीसरे चरण में पंचायत समिति एवं जिला परिषद सदस्यों के लिए मतदान हो रहा है। आगामी 5 नवंबर को तीसरे चरण में सरपंच पदों के लिए मतदान प्रस्तावित है।</p>
<p>इसी चुनावी माहौल में हमारी टीम दातारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों की जमीनी हकीकत जानने निकली। दातारामगढ़ क्षेत्र लंबे समय से जाट राजनीति के प्रभाव और नारायण सिंह चौधरी परिवार के राजनीतिक दबदबे के लिए जाना जाता है। यहां भारतीय जनता पार्टी आज तक विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाई है। लेकिन राजनीतिक वर्चस्व की इस कहानी के बीच गांवों के विकास की वास्तविक तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है।</p>
<p>खंडेलसर ग्राम पंचायत पहुंचने पर विकास के दावों की जमीनी हकीकत सामने आई।</p>
<p>ग्राम पंचायत भवन की स्थिति और आसपास की व्यवस्थाएं कई सवाल खड़े करती हैं। सरकारी धन से खरीदे गए कचरा पात्र गांव में जगह-जगह पड़े दिखाई दिए। इन कचरा पात्रों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। कहीं वे सड़क किनारे पड़े हैं तो कहीं उनके आसपास कचरा बिखरा हुआ है।</p>
<p>ग्रामीणों से बातचीत के दौरान झाबर जी भामू और भंवर जी भामू ने बताया कि गांव में नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था तक नहीं है। कचरा उठाने वाली गाड़ी का नियमित आना तो दूर, कभी-कभार बिल बनाने के समय गाड़ी बस स्टैंड तक आती है और औपचारिकता पूरी करके वापस चली जाती है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव में कचरा संग्रहण की नियमित व्यवस्था ही नहीं है, तो सरकारी धन से खरीदे गए कचरा पात्रों का आखिर क्या उपयोग? इनकी खरीद पर खर्च हुई राशि और इनके रखरखाव को लेकर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।</p>
<p>अब सरपंच चुनाव पर टिकी निगाहें</p>
<p>खंडेलसर ग्राम पंचायत में आगामी सरपंच चुनाव को लेकर भी मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। फिलहाल चुनावी मैदान में तीन प्रत्याशियों के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें वर्तमान सरपंच ओमप्रकाश भांभू के परिवार से श्रीमती अणची देवी, युवा प्रत्याशी सरिता और विमला चुनावी मैदान में हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।</p>
<p>लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांव के मतदाता इस बार किस आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनेंगे?</p>
<p>ग्रामीणों से हमारी अपील है कि मतदान से पहले अपने गांव की स्थिति का आकलन जरूर करें। सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, कचरा संग्रहण और अन्य मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही अपना मत दें। चुनाव के समय किए जाने वाले वादों से अधिक महत्वपूर्ण पिछले कार्यों का मूल्यांकन है।</p>
<p>गांव का विकास किसी जाति, परिवार या राजनीतिक प्रभाव का मोहताज नहीं होना चाहिए। जनता को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद भी गांव के बीच रहे और समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारी निभाए।</p>
<p>लोक उजाला और माईनेता की टीम राजस्थान की ग्राम पंचायतों की ऐसी ही जमीनी तस्वीर लगातार आपके सामने लाती रहेगी। हमारा प्रयास है कि चुनावी चर्चाओं के साथ गांवों के वास्तविक मुद्दों और जनसमस्याओं को भी प्रमुखता मिले।</p>
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		<title>राजस्थान से दिल्ली तक सियासत में हलचल, पंचायत चुनाव से SIR तक गरमाया राजनीतिक माहौल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:41:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#Bjprajshtan#madanrathor#govenddotasra#congreesrajshtan#ashokghalot#sachenpaelat#latestnewsrajshtan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर (पवन पुजारी)। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव कार्यक्रम में बदलाव से लेकर भाजपा-कांग्रेस के&#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>जयपुर (पवन पुजारी)। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव कार्यक्रम में बदलाव से लेकर भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी और देश की राजधानी में निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन तक बुधवार का राजनीतिक दिन कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के नाम रहा। राजस्थान में पंचायत चुनाव अब राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आते जा रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।<br />
राजस्थान की 7 बड़ी राजनीतिक खबरें<br />
1. पंचायत चुनाव कार्यक्रम में बदलाव, पहले तीन चरण एक दिन पहले<br />
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने धनतेरस को देखते हुए पंचायती राज चुनाव के पहले तीन चरणों के कार्यक्रम में बदलाव किया है। पहले चरण में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों का मतदान अब 23 अक्टूबर के बजाय 23 अक्टूबर रहेगा, जबकि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ चरणों को एक दिन पहले किया गया है। सरपंच एवं पंच चुनाव की तिथियों में भी संबंधित चरणों के अनुसार बदलाव किया गया है।<br />
राज्य में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों के चुनाव प्रस्तावित हैं। पंचायत चुनाव का राजनीतिक तापमान अब तेजी से बढ़ने के संकेत हैं।<br />
2. कल से पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण<br />
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 8 अक्टूबर से जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों तथा पहले चरण के पंच-सरपंच चुनाव के लिए लोक सूचना जारी होने की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले चरण में पंचायत समिति सदस्यों के नामांकन की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर और जांच 14 अक्टूबर निर्धारित है।<br />
ऐसे में आने वाले दिनों में गांवों की राजनीति में दावेदारों की सक्रियता, टिकट की दौड़ और स्थानीय समीकरणों में तेजी आने की संभावना है।<br />
3. SIR पर राजस्थान भाजपा का कांग्रेस पर हमला<br />
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। राठौड़ ने कांग्रेस के दिल्ली प्रदर्शन और सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता संबंधी सवालों को राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाया।<br />
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता की मांग कर रही है।<br />
4. राजस्थान कांग्रेस में निकाय चुनाव के बाद मंथन<br />
हाल के नगर निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन और कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजस्थान कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति बनाई है। समिति कांग्रेस पार्षदों के स्तर पर सामने आए आरोपों और शिकायतों की जांच करेगी।<br />
इस घटनाक्रम को पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए संगठनात्मक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।<br />
5. कांग्रेस के अंदरूनी विवाद भी चर्चा में<br />
दूदू में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान सचिन पायलट और बाबूलाल नागर समर्थकों के बीच विवाद की खबरों ने पार्टी के भीतर गुटीय राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी में हुए घटनाक्रम को आगामी चुनावों के लिहाज से पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है।<br />
6. भाजपा का &#8216;सेवा ज्योति एवं संकल्प&#8217; कार्यक्रम<br />
राजस्थान भाजपा की ओर से 7 अक्टूबर को सभी जिला केंद्रों पर &#8216;सेवा ज्योति एवं संकल्प&#8217; कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की मौजूदगी में कार्यक्रम प्रस्तावित है। भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जोड़कर सेवा और संकल्प के संदेश का कार्यक्रम बताया है।<br />
7. राजस्थान क्रिकेट संघ पर भी नजर<br />
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव परिणाम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद परिणामों पर रोक के बीच राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं पर सुनवाई का मामला महत्वपूर्ण बना हुआ है। कल की सुनवाई के बाद RCA में आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।<br />
देश की राजनीति की बड़ी खबरें<br />
1. निर्वाचन आयोग के खिलाफ विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन<br />
नई दिल्ली में मंगलवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा SIR और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया; बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।<br />
कांग्रेस का कहना है कि वह मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहती है, जबकि भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक ड्रामा और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला बताया है।<br />
2. राहुल गांधी के प्रदर्शन पर भाजपा का पलटवार<br />
भाजपा ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद लगातार निर्वाचन आयोग और अन्य संस्थाओं को निशाना बना रही है।<br />
सत्ता पक्ष का तर्क है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को जनता के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokujalanews.com/archives/747">राजस्थान से दिल्ली तक सियासत में हलचल, पंचायत चुनाव से SIR तक गरमाया राजनीतिक माहौल</a> appeared first on <a href="https://www.lokujalanews.com">Lok Ujala News</a>.</p>
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		<title>अर्जुन लाल मीणा: सांसद से संगठन के रणनीतिक मैदान तक, 2024 के बाद बदली राजनीतिक भूमिका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Oct 2026 04:54:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#Bjprajshtan#Bjp#uadipurbjp]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>New Delhi(pawan p.) उदयपुर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे पूर्व सांसद अर्जुन लाल मीणा की राजनीतिक भूमिका&#8230;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokujalanews.com/archives/743">अर्जुन लाल मीणा: सांसद से संगठन के रणनीतिक मैदान तक, 2024 के बाद बदली राजनीतिक भूमिका</a> appeared first on <a href="https://www.lokujalanews.com">Lok Ujala News</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>New Delhi(pawan p.)<br />
उदयपुर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे पूर्व सांसद अर्जुन लाल मीणा की राजनीतिक भूमिका 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बदल गई है। 2014 और 2019 में उदयपुर लोकसभा सीट से लगातार दो बार भाजपा के सांसद रहे मीणा अब संसद में नहीं हैं, लेकिन भाजपा के संगठनात्मक और चुनावी काम में उनकी भूमिका बनी हुई है। 2026 में पार्टी ने उन्हें राजस्थान के कोटा संभाग की संभागीय चुनाव संचालन समिति में शामिल किया है।<br />
दो लोकसभा चुनावों में जीत से बनी पहचान<br />
अर्जुन लाल मीणा ने 2014 में पहली बार उदयपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद 2019 में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की। 17वीं लोकसभा में उनका कार्यकाल 23 मई 2019 से 5 जून 2024 तक<br />
संसद में उनके प्रदर्शन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 81 प्रतिशत रही और उन्होंने 262 प्रश्न पूछे। इस दौरान उन्होंने 39 बहसों में हिस्सा लि<br />
2024 में बदला राजनीतिक समीकरण<br />
लगातार दो बार सांसद रहने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उदयपुर से अर्जुन लाल मीणा के स्थान पर मन्नालाल रावत को उम्मीदवार बनाया। मन्नालाल रावत चुनाव जीतकर उदयपुर के सांसद बने।<br />
इस बदलाव के साथ अर्जुन लाल मीणा की प्रत्यक्ष संसदीय राजनीति का दौर समाप्त हुआ, लेकिन भाजपा में उनकी राजनीतिक यात्रा जारी रही।<br />
सांसद से संगठन की जिम्मेदारी तक<br />
2026 में राजस्थान में नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों की तैयारियों के दौरान भाजपा ने सभी सात संभागों में संभागीय चुनाव संचालन समितियां गठित कीं। इन समितियों में वरिष्ठ नेताओं, पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों को जिम्मेदारियां दी गईं। कोटा संभाग की समिति में सी.पी. जोशी, अर्जुन लाल मीणा और अजीत मेहता को शामिल किया गया।<br />
इस जिम्मेदारी के मायने इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कोटा संभाग में चुनावी संगठन, स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय और जमीनी राजनीतिक फीडबैक जैसे कामों में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रखी गई है।<br />
2024 के बाद क्या बदला?<br />
अर्जुन लाल मीणा के राजनीतिक सफर को तीन चरणों में देखा जा सकता है—<br />
पहला चरण — उदयपुर की राजनीति:<br />
भाजपा के स्थानीय संगठन से आगे बढ़कर उदयपुर लोकसभा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान बनाना।<br />
दूसरा चरण — संसद की राजनीति:<br />
2014 और 2019 में लगातार दो लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बनना।<br />
तीसरा चरण — संगठनात्मक राजनीति:<br />
2024 में लोकसभा टिकट नहीं मिलने के बाद 2026 में भाजपा की संभागीय चुनाव संचालन व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना।<br />
इस तरह उनकी वर्तमान भूमिका सांसद के रूप में नहीं बल्कि भाजपा के वरिष्ठ चुनावी एवं संगठनात्मक नेता के रूप में दिखाई देती है।<br />
राजनीतिक चुनौतियां भी कम नहीं<br />
अर्जुन लाल मीणा के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव 2024 में लोकसभा टिकट का बदलना रहा। इसके बाद उदयपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मन्नालाल रावत कर रहे हैं। इसलिए उदयपुर में उनकी भूमिका को अब मौजूदा सांसद की भूमिका से अलग करके देखना होगा।<br />
वहीं, कोटा संभाग की जिम्मेदारी मिलने से यह भी स्पष्ट है कि भाजपा ने उनके पूर्व सांसद के अनुभव को केवल उदयपुर तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन्हें दूसरे संभाग में चुनावी संगठन के काम में लगाया है। 2026 की चुनावी समितियों में पार्टी ने अलग-अलग संभागों के लिए अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी है।<br />
वर्तमान राजनीतिक तस्वीर<br />
अर्जुन लाल मीणा की वर्तमान स्थिति को संक्षेप में इस प्रकार समझा जा सकता है—<br />
पद: पूर्व लोकसभा सांसद<br />
लोकसभा क्षेत्र: उदयपुर<br />
सांसद रहे: 2014–2019 और 2019–2024<br />
पार्टी: भारतीय जनता पार्टी<br />
2024: लोकसभा टिकट नहीं मिला; भाजपा ने उदयपुर से मन्नालाल रावत को उम्मीदवार बनाया<br />
2026 की भूमिका: कोटा संभाग की भाजपा संभागीय चुनाव संचालन समिति में सदस्य<br />
वर्तमान भूमिका का केंद्र: चुनावी संगठन, समन्वय और पार्टी की जमीनी राजनीतिक गतिविधियां।<br />
निष्कर्ष<br />
अर्जुन लाल मीणा की राजनीति का मौजूदा अध्याय संसद से बाहर जरूर है, लेकिन संगठन के भीतर उनकी सक्रियता बनी हुई है। 2024 में लोकसभा टिकट परिवर्तन के बाद उनके राजनीतिक सफर में एक बड़ा बदलाव आया, जबकि 2026 में भाजपा द्वारा कोटा संभाग की चुनाव संचालन समिति में शामिल किए जाने से उन्हें संगठनात्मक राजनीति में नई जिम्मेदारी मिली है।<br />
उदयपुर से दो बार सांसद रहे अर्जुन लाल मीणा अब संसद की बजाय संगठन के चुनावी मैदान में भाजपा के अनुभव का हिस्सा हैं। उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी आने वाले समय में उनके संगठनात्मक अनुभव का किस तरह उपयोग करती है।</p>
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		<title>आरसीए चुनाव में आरोपों की बौछार, भाजपा अपनों के बीच उलझी—नेता पुत्रों के आरोपों से गरमाई सियासत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 00:23:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव ने खेल संगठन की राजनीति को एक बार फिर प्रदेश की सियासत के&#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव ने खेल संगठन की राजनीति को एक बार फिर प्रदेश की सियासत के केंद्र में ला दिया है। चुनाव में भाजपा से जुड़े राजनीतिक परिवारों के कई चेहरे आमने-सामने रहे। नाम वापसी के बाद कुछ प्रत्याशी मैदान से हटे, लेकिन धनंजय सिंह खींवसर, मोहित यादव और आशीष तिवाड़ी मैदान में बने रहे।<br />
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के पुत्र पवन दिलावर और पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह राठौड़ ने चुनावी प्रक्रिया से अपना नाम वापस लिया। वहीं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय सिंह खींवसर, भाजपा विधायक जसवंत यादव के पुत्र मोहित यादव और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के पुत्र आशीष तिवाड़ी चुनाव में डटे रहे।<br />
चुनाव के बाद अपने ही खेमे से गंभीर सवाल<br />
मतदान के बाद धनंजय सिंह खींवसर, मोहित यादव और आशीष तिवाड़ी की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर शिकायतें और आपत्तियां सामने आईं। इनमें मतदाताओं पर दबाव बनाए जाने, कुछ जिला क्रिकेट संघों को मतदान से दूर रखने और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।<br />
विवाद के केंद्र में अरुण चतुर्वेदी का नाम भी आया। आरोप लगाने वालों ने चुनाव प्रक्रिया में उनके प्रभाव और भूमिका पर सवाल उठाए। दूसरी ओर चतुर्वेदी ने आरोपों का खंडन करते हुए अपना पक्ष रखा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि वे मतदान के दौरान वहां मौजूद नहीं थे और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हुई।<br />
डोटासरा भी मैदान में उतरे<br />
RCA विवाद में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी भाजपा पर सवाल उठाए। डोटासरा ने चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए यह सवाल उठाया कि यदि निर्णय पहले से तय या पर्ची के आधार पर होना था, तो चुनावी प्रक्रिया का इतना बड़ा आयोजन क्यों किया गया।<br />
अब असली सवाल—RCA में खेल या सियासत?<br />
RCA चुनाव में जिस तरह एक ही राजनीतिक दल से जुड़े परिवारों के चेहरे आमने-सामने आए और चुनाव के बाद उन्हीं खेमों से प्रक्रिया पर सवाल उठे, उसने भाजपा के भीतर की खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।<br />
हालांकि, इन आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच अंतिम स्थिति कानूनी एवं चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल RCA चुनाव के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। 35 मत पड़े, जबकि तीन विवादित जिला संघों ने मतदान से दूरी बनाई।<br />
आरसीए का चुनाव अब सिर्फ क्रिकेट संगठन का चुनाव नहीं रह गया है—यह भाजपा के भीतर राजनीतिक प्रभाव, संगठनात्मक नियंत्रण और खेल प्रशासन को लेकर चल रही खींचतान का भी बड़ा मंच बन गया है।</p>
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		<title>कैलाश सिंह राठौड़, पूर्व प्रधान कपासन, चित्तौड़गढ़ का जीवन परिचय जल्द ही तैयार कर देंगे।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2026 14:21:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कैलाश सिंह राठौड़, पूर्व प्रधान कपासन, चित्तौड़गढ़ का जीवन परिचय जल्द ही तैयार कर देंगे।</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कैलाश सिंह राठौड़, पूर्व प्रधान कपासन, चित्तौड़गढ़ का जीवन परिचय जल्द ही तैयार कर देंगे।</p>
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		<title>चित्तौड़गढ़ कांग्रेस में खींचतान पर सवाल, निकाय के बाद पंचायत चुनाव तक पहुंची गुटबाजी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 05:00:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#govindsingdotsara #aicc #ashokghot]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चित्तौड़गढ़। जिले की कांग्रेस राजनीति में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत और जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया के बीच कथित&#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>चित्तौड़गढ़। जिले की कांग्रेस राजनीति में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत और जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया के बीच कथित राजनीतिक खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। जिला कांग्रेस में सिसोदिया को पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के करीब माना जाता है, जबकि जाड़ावत और आंजना के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में जिला अध्यक्ष पद को लेकर भी दोनों खेमों के बीच दूरी का उल्लेख हुआ है।<br />
हालिया नगर निकाय चुनाव परिणाम ने इन सवालों को और हवा दी है। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में भाजपा को 33 और कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं, जबकि निंबाहेड़ा में भाजपा 27 और कांग्रेस 17 वार्डों पर रही। निंबाहेड़ा में भाजपा की शिल्पा भूतड़ा निर्विरोध सभापति चुनी गईं।<br />
पूर्व जिलाध्यक्ष का पत्र बना नया मुद्दा<br />
इसी बीच कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष भैरूलाल चौधरी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र लिखकर प्रमोद सिसोदिया की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और उन्हें पद से हटाने तथा पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। पत्र में कपासन और चित्तौड़गढ़ के निकाय चुनावों में संगठनात्मक निर्णयों तथा कथित क्रॉस-वोटिंग को लेकर आरोप लगाए गए हैं। ये चौधरी द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई<br />
आंजना–जाड़ावत समीकरण के बीच सिसोदिया की भूमिका पर चर्चा<br />
कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में सिसोदिया को उदयलाल आंजना के खेमे से जोड़कर देखा जाता है। वहीं जाड़ावत खेमे की अलग राजनीतिक पकड़ मानी जाती रही है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या दो प्रभावशाली खेमों के बीच की दूरी का असर संगठन और चुनावी प्रबंधन पर पड़ रहा है? निंबाहेड़ा में चुनाव के दौरान कांग्रेस की कमान खुद उदयलाल आंजना संभाल रहे थे, जबकि भाजपा की ओर से विधायक श्रीचंद कृपलानी सक्रिय थे।<br />
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में सिसोदिया और भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी के बीच कथित मित्रता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती, इसलिए इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।<br />
अब सबसे बड़ा सवाल—पंचायत चुनाव में क्या होगा?<br />
नगर निकाय चुनाव के बाद अब कांग्रेस के सामने पंचायती राज चुनाव की चुनौती है। संगठन के भीतर यदि गुटीय मतभेद जारी रहे तो टिकट वितरण, स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व के सामने यह भी चुनौती है कि जाड़ावत, आंजना और सिसोदिया से जुड़े राजनीतिक समीकरणों के बीच संगठन को किस तरह एक मंच पर रखा जाए।<br />
चित्तौड़गढ़ कांग्रेस के सामने अब असली परीक्षा यही है—क्या व्यक्तिगत और गुटीय समीकरण पीछे छूटेंगे, या संगठन की राजनीति में खींचतान आगे भी चुनावी मुद्दा बनी रहेगी?</p>
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		<title>कपासन में भाजपा की पंचायत चुनावी रणनीति पर मंथन, कार्यकर्ताओं की टटोली नब्ज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Sep 2026 12:29:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#BJPRajshtan #Rajsamnd #BABARamdev]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कपासन। आगामी पंचायती राज चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कपासन ग्रामीण मंडल एवं शनि महाराज मंडल की संयुक्त&#8230;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokujalanews.com/archives/719">कपासन में भाजपा की पंचायत चुनावी रणनीति पर मंथन, कार्यकर्ताओं की टटोली नब्ज</a> appeared first on <a href="https://www.lokujalanews.com">Lok Ujala News</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कपासन। आगामी पंचायती राज चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कपासन ग्रामीण मंडल एवं शनि महाराज मंडल की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में क्षेत्र की आगामी चुनावी रणनीति और संभावित प्रत्याशियों को लेकर कार्यकर्ताओं से रायशुमारी की गई।<br />
बैठक में कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए उनके मन की बात और चुनाव को लेकर उनके विचार जानने का प्रयास किया। खास तौर पर प्रधान पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के चलते संभावित दावेदारों और पार्टी की रणनीति को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण रही।<br />
बैठक में पूर्व विधायक बद्रीलाल जाट सहित पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने अपनी-अपनी राय रखी और क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की।<br />
बैठक से यह संकेत सामने आया कि पार्टी स्तर पर सामूहिक राय और संगठन की सहमति के आधार पर टिकट चयन की दिशा में विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम प्रत्याशी को लेकर कोई निर्णय सामने नहीं आया है।<br />
कपासन नगर पालिका चुनाव के बाद अब पंचायती राज चुनाव में भाजपा किस रणनीति के साथ मैदान में उतरती है और प्रधान पद के लिए किस चेहरे पर भरोसा जताया जाता है, यह आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय रहेगा।</p>
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		<item>
		<title>आसींद से 28 सितंबर के जयपुर प्रदर्शन में बड़ी भागीदारी का दावा, हंगामीलाल मेवाड़ा बोले—संघर्ष जारी रहेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 13:32:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#BJPRajshtan #Rajsamnd #BABARamdev]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आसींद/भीलवाड़ा। राजस्थान कांग्रेस की ओर से 28 सितंबर को जयपुर में चुनाव आयोग के कार्यालय के घेराव के आह्वान के&#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आसींद/भीलवाड़ा। राजस्थान कांग्रेस की ओर से 28 सितंबर को जयपुर में चुनाव आयोग के कार्यालय के घेराव के आह्वान के बीच आसींद के पूर्व विधायक हंगामीलाल मेवाड़ा ने कहा है कि आसींद और भीलवाड़ा क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग जयपुर पहुंचेंगे। राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी 28 सितंबर को जयपुर में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के घेराव की घोषणा की है।<br />
मेवाड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पूरी नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ये मांगें कांग्रेस की ओर से उठाई जा रही हैं।<br />
डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस मजबूत होने का दावा<br />
हंगामीलाल मेवाड़ा ने कहा कि गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस राजस्थान में मजबूत हो रही है और संगठन लगातार सक्रिय है। उन्होंने कहा कि 28 सितंबर का जयपुर प्रदर्शन इसी व्यापक आंदोलन का हिस्सा है।<br />
राहुल गांधी की रैली का किया उल्लेख<br />
मेवाड़ा ने 14 दिसंबर 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ महारैली का भी उल्लेख किया। कांग्रेस ने यह रैली कथित ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को लेकर आयोजित की थी। राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हुए थे।<br />
मेवाड़ा का कहना था कि राहुल गांधी ने काफी पहले ही चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे और अब चुनाव आयोग की ओर से किसी तरह का आश्वासन दिए जाने के बावजूद कांग्रेस अपने मुद्दे पर आंदोलन कर रही है।<br />
आसींद की स्थानीय राजनीति पर भी साधा निशाना<br />
पूर्व विधायक ने आसींद की स्थानीय राजनीति को लेकर भी मौजूदा विधायक और नगर निकाय बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आसींद की जनता परेशान है और दूसरी बार विधायक बने प्रशांत सांखला के नेतृत्व में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों के साथ कथित तौर पर हॉर्स ट्रेडिंग और पैसों के लेन-देन का सहारा लिया गया।<br />
हालांकि, ये आरोप हंगामीलाल मेवाड़ा के राजनीतिक बयान/दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। इसलिए इन्हें तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।<br />
28 सितंबर पर नजर<br />
28 सितंबर को जयपुर में होने वाले प्रदर्शन को लेकर अब आसींद और भीलवाड़ा से भागीदारी का मुद्दा भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस का घोषित कार्यक्रम चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों और विशेष गहन पुनरीक्षण की पारदर्शिता जैसे सवालों पर केंद्रित है।<br />
हंगामीलाल मेवाड़ा के अनुसार, आसींद से बड़ी संख्या में लोग जयपुर पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होंगे और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा </p>
<p>The post <a href="https://www.lokujalanews.com/archives/709">आसींद से 28 सितंबर के जयपुर प्रदर्शन में बड़ी भागीदारी का दावा, हंगामीलाल मेवाड़ा बोले—संघर्ष जारी रहेगा</a> appeared first on <a href="https://www.lokujalanews.com">Lok Ujala News</a>.</p>
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		<title>सरपंच आरक्षण लॉटरी के बाद राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[लोक उजाला]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 04:25:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[#Bjprajshtan#madanrathor#govenddotasra#congreesrajshtan#ashokghalot#sachenpaelat#latestnewsrajshtan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर (पवन पुजारी)। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर अब ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमाने&#8230;</p>
<p>The post <a href="https://www.lokujalanews.com/archives/704">सरपंच आरक्षण लॉटरी के बाद राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल</a> appeared first on <a href="https://www.lokujalanews.com">Lok Ujala News</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>जयपुर (पवन पुजारी)। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर अब ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमाने लगा है। पंचायत समिति प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पदों के आरक्षण के बाद आज ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच पदों की आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही गांवों में चुनावी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।<br />
लॉटरी से तय हुई सीटों की तस्वीर<br />
आरक्षण लॉटरी में यह तय हुआ कि किस ग्राम पंचायत में सरपंच पद SC, ST, OBC, महिला या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। इसी के साथ ग्राम पंचायतों के वार्ड पंच पदों की आरक्षण श्रेणी भी निर्धारित की गई।<br />
सरपंच और वार्ड पंच की सीटों का आरक्षण स्पष्ट होते ही लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित दावेदारों की रणनीति भी बदल गई है। जिन पंचायतों में सीट आरक्षित हुई है, वहां नए चेहरों की तलाश शुरू हो गई है, जबकि सामान्य सीटों पर पुराने दावेदार अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं।<br />
गांवों में शुरू होगा बैठकों और संपर्क का दौर<br />
आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद अब गांवों में चौपाल, बैठक और व्यक्तिगत संपर्क का दौर तेज होने की संभावना है। संभावित प्रत्याशी अपने समर्थकों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधेंगे। कई जगहों पर परिवार और सामाजिक समूह भी अपने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू कर चुके हैं।<br />
पवन पुजारी के अनुसार, पंचायत चुनावों में आरक्षण लॉटरी के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब दावेदारों को अपनी राजनीतिक तैयारी सीट की नई आरक्षण श्रेणी के हिसाब से करनी होगी।<br />
वार्ड पंचों की लॉटरी भी महत्वपूर्ण<br />
सरपंच के साथ वार्ड पंचों के आरक्षण ने भी गांव की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रत्येक वार्ड की श्रेणी स्पष्ट होने के बाद स्थानीय स्तर पर संभावित प्रत्याशियों की तस्वीर सामने आएगी। इससे पंचायत चुनाव की जमीनी तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है।<br />
अब चुनाव कार्यक्रम का इंतजार<br />
आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ग्रामीण राजस्थान की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग के चुनाव कार्यक्रम पर टिकी हैं। नामांकन, मतदान और मतगणना की तारीखों की घोषणा के साथ ही पंचायत चुनाव का औपचारिक अभियान शुरू हो जाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://www.lokujalanews.com/archives/704">सरपंच आरक्षण लॉटरी के बाद राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल</a> appeared first on <a href="https://www.lokujalanews.com">Lok Ujala News</a>.</p>
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