Rajsamand
कुमावत समाज कभी कांग्रेस का मजबूत वोट आधार माना जाता था, लेकिन लंबे समय तक सम्मानजनक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और टिकटों की कमी के चलते समाज का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा। अब राजसमंद में यही समाज अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर सवाल उठा रहा है।
कुमावत समाज के अध्यक्ष सुंदरलाल कुमावत का कहना है कि वे कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्ष रहे, लेकिन समाज को अपेक्षित राजनीतिक अवसर नहीं मिले। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर भी समाज को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और टिकटों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। सीपी जोशी को लेकर समाज में कुछ राजनीतिक चर्चाएं और आरोप भी सुनने को मिलते हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
दूसरी ओर, भाजपा ने समय-समय पर कुमावत समाज को विधानसभा में प्रतिनिधित्व दिया है, जिससे समाज का भाजपा के प्रति जुड़ाव मजबूत हुआ। अब सवाल यह है कि 30 हजार से अधिक वोट होने का दावा करने वाला कुमावत समाज आखिर किसके साथ जाएगा?
क्या कांग्रेस ओबीसी समाज में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कुमावत समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी देगी? और क्या भाजपा भविष्य में भी इस बड़े सामाजिक आधार को अपने साथ बनाए रख पाएगी?
राजसमंद की राजनीति में कुमावत समाज अब सिर्फ वोट नहीं, सम्मान और हिस्सेदारी की राजनीति की बात कर रहा है—आने वाले चुनावी समीकरण इसका जवाब देंगे।
कुमावत समाज की सियासत: कांग्रेस से भाजपा तक, अब फिर हिस्सेदारी का सवाल
