भाजपा के बागियों ने बढ़ाई टेंशन, आखिरी दिन खुद मैदान में उतरे CM और प्रदेश अध्यक्ष
जयपुर में टिकट से नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में भाजपा की बड़ी परीक्षा, 2028 के लिए भी उठे सवाल
जयपुर। नगर निगम चुनाव में नामांकन वापसी के अंतिम दिन राजस्थान भाजपा के सामने बागियों को मनाने की बड़ी चुनौती दिखाई दी। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। हालात ऐसे बने कि आखिरी समय में बागियों को मनाने की कमान स्थानीय नेताओं से निकलकर प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गई।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी तक को नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए सक्रिय होना पड़ा। इसके बावजूद सभी बागियों को मनाने में सफलता नहीं मिल सकी और कई बागी चुनावी मैदान में डटे रहे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस भाजपा में संगठन और अनुशासन को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है, वहां नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण के बाद इतनी बड़ी संख्या में बगावत के सुर क्यों सुनाई दे रहे हैं?
यह सवाल सिर्फ नगर निगम चुनाव तक सीमित नहीं है। 2028 के विधानसभा चुनाव में यदि किसी नेता या कार्यकर्ता को टिकट नहीं मिला तो क्या उसे मनाने के लिए प्रदेश नेतृत्व के साथ राष्ट्रीय नेतृत्व को भी मैदान में उतरना पड़ेगा?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लगातार संगठनात्मक कार्यक्रमों और कार्यकर्ता आधारित अभियानों के जरिए पार्टी को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि जमीनी स्तर पर नाराजगी और बगावत दिखाई दे रही है, तो पार्टी नेतृत्व के लिए यह गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
वहीं कांग्रेस में भी टिकट वितरण को लेकर नाराजगी और बगावत देखने को मिली, लेकिन शुरुआती तस्वीर में भाजपा के सामने बागियों की चुनौती अधिक बड़ी नजर आई।
अब असली सवाल चुनाव परिणाम के बाद सामने आएगा—बागियों ने भाजपा को कितना नुकसान पहुंचाया और कांग्रेस को कितना?
यदि नगर निगम और आगामी पंचायती राज चुनावों के परिणाम भाजपा की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे, तो राजस्थान भाजपा संगठन और सरकार के कामकाज को लेकर बड़े राजनीतिक फैसलों की चर्चा तेज हो सकती है। कार्यकर्ताओं को विश्वास में लेना, मंत्रियों और विधायकों से उनकी दूरी कम करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना भाजपा के लिए आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
राजस्थान की राजनीति में यह बगावत सिर्फ टिकट की नाराजगी है या संगठन के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत—इसका जवाब आने वाले चुनाव परिणाम देंगे।
भाजपा के बागियों ने बढ़ाई टेंशन, आखिरी दिन खुद मैदान में उतरे CM और प्रदेश अध्यक्ष
