राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026: भाजपा को बढ़त, कांग्रेस ने भी कई जगह दी चुनौती
बड़े शहरों में भाजपा मजबूत, लेकिन अजमेर-पाली जैसे इलाकों में कांग्रेस और निर्दलीयों ने बदला समीकरण
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों ने प्रदेश की शहरी राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। समग्र रूप से भाजपा बढ़त में दिखाई दे रही है, लेकिन इसे एकतरफा जीत कहना भी सही नहीं होगा। कई महत्वपूर्ण शहरों और निकायों में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया है और निर्दलीयों ने भी कई जगह निर्णायक भूमिका निभाई है।
भाजपा का प्रदेशभर में पलड़ा भारी
अब तक घोषित परिणामों में भाजपा ने कांग्रेस से अधिक वार्ड जीते हैं। एक ताजा समेकित रिपोर्ट के अनुसार भाजपा करीब 4,178 वार्डों में और कांग्रेस 3,612 वार्डों में विजयी रही है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या भी काफी बड़ी है।
इस लिहाज से नगर निकाय चुनाव का पहला बड़ा संदेश भाजपा की शहरी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ के रूप में सामने आता है। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी कई महत्वपूर्ण नगर निकायों में भाजपा को रोकने में सफलता हासिल की है।
बड़े शहरों में मिला-जुला जनादेश
नगर निगमों के परिणाम इस चुनाव को वास्तव में मिश्रित जनादेश बनाते हैं।
जयपुर में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 77 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस 52 पर रही।
उदयपुर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला—80 में से 53 वार्ड भाजपा के खाते में गए, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं।
बीकानेर में तस्वीर पलट गई और कांग्रेस सबसे आगे रही।
अजमेर में कांग्रेस 37 वार्डों के साथ भाजपा के 32 वार्डों से आगे रही; 11 वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए।
पाली में भी कांग्रेस ने 29 वार्ड जीतकर भाजपा के 21 वार्डों पर बढ़त बनाई, जबकि 15 सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं।
भरतपुर में निर्दलीयों ने सबसे बड़ा उलटफेर किया—65 में से 36 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी/आगे रहे।
मदन राठौड़ के लिए पाली का परिणाम क्यों महत्वपूर्ण?
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली का परिणाम भाजपा के प्रदेश संगठन के लिए राजनीतिक रूप से जरूर चर्चा का विषय रहेगा। यहां कांग्रेस 29 वार्डों के साथ भाजपा से आगे रही और निर्दलीयों ने भी 15 सीटें हासिल कीं।
यानी एक तरफ पूरे राजस्थान में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा, तो दूसरी तरफ पाली जैसे अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा को अपेक्षित बढ़त नहीं मिलना संगठन के लिए आत्ममंथन का विषय हो सकता है।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा दोनों दलों का गणित
इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं है। कई निकायों में निर्दलीय पार्षद किंगमेकर बनकर सामने आए हैं। अजमेर, पाली, जोधपुर और भरतपुर जैसे शहरों में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
निष्पक्ष राजनीतिक निष्कर्ष
नगर निकाय चुनाव का जनादेश भाजपा के पक्ष में जरूर झुका हुआ है, लेकिन यह कांग्रेस की पूर्ण पराजय नहीं है। भाजपा ने जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर, अजमेर और पाली जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। निर्दलीयों का मजबूत प्रदर्शन बताता है कि स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशी चयन भी मतदाताओं के फैसले में महत्वपूर्ण रहे।
इस चुनाव को 2028 विधानसभा चुनाव का सीधा पूर्वानुमान मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि राजस्थान की शहरी राजनीति में भाजपा फिलहाल बढ़त पर है और कांग्रेस के सामने संगठन तथा स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने की चुनौती है।
