नाथद्वारा/राजसमंद।
नगर निकाय चुनाव की रणध्वनि के बीच नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र का वार्ड नंबर 38 इस बार सिर्फ एक चुनावी सीट नहीं, बल्कि उन सवालों का केंद्र बन गया है जिनका जवाब वर्षों से तलाशा जा रहा है।
सवाल सीधा है—आजादी के इतने वर्षों बाद भी क्या किसी बस्ती के परिवार बिजली कनेक्शन और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं?
वार्ड 38 में स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों के मुताबिक करीब 30 से 50 परिवार ऐसे हैं, जो लंबे समय से यहां निवास कर रहे हैं। इनमें कुछ परिवारों के बारे में दावा किया जा रहा है कि वे करीब तीन दशक से यहां रह रहे हैं, लेकिन आज भी बिजली कनेक्शन, शौचालय, पानी और सरकारी योजनाओं के लाभ जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यही वजह है कि इस बार वार्ड 38 का चुनाव पार्टी से ज्यादा सुविधाओं और विकास के सवाल पर लड़ा जाता दिखाई दे रहा है।
पांच साल बोर्ड रहा, फिर भी समस्या क्यों नहीं सुलझी?
वार्ड 38 में पिछले पांच वर्षों तक कांग्रेस का बोर्ड रहा। इसके बावजूद अगर आज भी कुछ परिवार बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित होने का दावा कर रहे हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
आखिर पांच वर्षों में इन परिवारों की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
क्षेत्र में बने सार्वजनिक शौचालयों को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ शौचालय बने तो हैं, लेकिन उनकी स्थिति खराब है और कई जगह उनका इस्तेमाल तक नहीं हो पा रहा। नतीजा यह है कि लोगों को आज भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
यह स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “हर घर शौचालय” और “हर घर नल” जैसे लक्ष्यों के सामने भी स्थानीय स्तर पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
भाजपा ने बनाया “विकास का अधूरा काम” चुनावी मुद्दा
इस बार भाजपा ने वार्ड 38 से रजनी लोधा को मैदान में उतारा है। रजनी लोधा का कहना है कि वार्ड की स्थिति देखने के लिए किसी राजनीतिक भाषण की जरूरत नहीं है—क्षेत्र में जाकर खुद स्थिति देखी जा सकती है।
उनका दावा है कि वार्ड की समस्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वन विभाग की जमीन से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को वर्तमान विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ के सामने भी लगातार उठाया जा रहा है और वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जा रही है।
रजनी लोधा का तर्क है कि विकास के लिए केवल स्थानीय स्तर पर आवाज उठाना पर्याप्त नहीं है। पार्षद नगर पालिका में मुद्दा उठाए, विधायक उसे विधानसभा तक लेकर जाए और प्रशासनिक स्तर पर समाधान की कोशिश हो—तभी विकास की कड़ी पूरी होगी।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल
महिला सीट होने के बाद कांग्रेस ने सीमा सोनी को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पिछले कार्यकाल में जिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया, उनका जवाब जनता को किस रूप में दिया जाएगा?
सीमा सोनी से बातचीत का प्रयास किया गया, लेकिन व्यस्तता के कारण उनका विस्तृत पक्ष सामने नहीं आ सका।
ऐसे में चुनावी मैदान में अब एक बड़ा सवाल खड़ा है—
क्या वार्ड 38 की जनता पिछले पांच वर्षों के कामकाज का हिसाब मांगेगी या नए चेहरे को मौका देगी?
वार्ड 38 से आगे की राजनीति भी जुड़ी
इस चुनाव की अहमियत केवल वार्ड तक सीमित नहीं है। नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र का यह चुनाव क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ और लोकसभा सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ के लिए भी नगर निकाय चुनाव संगठनात्मक पकड़ और स्थानीय स्तर पर प्रभाव दिखाने की परीक्षा होंगे।
लेकिन वार्ड 38 में राजनीति से बड़ा मुद्दा बिजली का कनेक्शन, पानी, शौचालय और सम्मान के साथ जीवन जीने की सुविधा बन गया है।
अब जनता के सामने दो चेहरे, एक बड़ा सवाल
एक तरफ कांग्रेस की सीमा सोनी, दूसरी तरफ भाजपा की रजनी लोधा।
एक तरफ पिछले कार्यकाल से जुड़े सवाल, दूसरी तरफ बदलाव और विकास का दावा।
लेकिन इन सबसे ऊपर खड़ा है वार्ड 38 का वह परिवार, जो पूछ रहा है—
“तीन दशक से यहां रह रहे हैं… आखिर कब मिलेगा बिजली का कनेक्शन?”
और वह सवाल—
“शौचालय बना है तो बंद क्यों है?”
और सबसे बड़ा सवाल—
“क्या इस बार चुनाव के बाद वार्ड 38 की तस्वीर बदलेगी?”
इसका फैसला अब किसी नेता के बयान से नहीं, बल्कि वार्ड नंबर 38 की जनता के वोट से होगा।
वार्ड 38 का सवाल: तीन दशक बाद भी बिजली-शौचालय से क्यों वंचित हैं परिवार?
