राजसमंद। नाथद्वारा नगर पालिका चुनाव की रणभेरी बजते ही भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वरिष्ठ नेताओं से लेकर पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे दावेदारों तक, टिकट और जीत को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। कल नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख से पहले दोनों ही दलों में बागियों को मनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
नाथद्वारा की राजनीति में कांग्रेस की ओर से देवकी नंदन गुर्जर द्वारा अपने पुत्र को राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, भाजपा की ओर से पहली बार नगर पालिका चुनाव की राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे विश्वराज सिंह मेवाड़ के लिए भी यह चुनाव अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
यदि भाजपा नगर पालिका में बोर्ड बनाने में सफल रहती है, तो निश्चित रूप से विश्वराज सिंह मेवाड़ की राजनीतिक पकड़ को मजबूती मिलने का संदेश जाएगा। लेकिन दूसरी ओर भाजपा के भीतर सामने आ रहे बागी पार्टी के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। C.P. जोशी और अन्य स्थानीय दावेदारों से जुड़े असंतोष का कितना असर भाजपा के चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
कांग्रेस में भी बगावत और असंतोष की स्थिति है, लेकिन फिलहाल पार्टी के भीतर इसे नियंत्रित करने और नाराज नेताओं को संतुष्ट करने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं।
इस चुनाव की एक और खास बात यह है कि वर्तमान सरकार का लगभग दो वर्ष का कार्यकाल शेष रहेगा। ऐसे में जो पार्षद चुने जाएंगे, उन्हें मौजूदा सरकार के साथ करीब दो वर्ष और आगामी सरकार के साथ लगभग तीन वर्ष काम करने का अवसर मिलेगा। इसलिए नगर पालिका चुनाव केवल स्थानीय सत्ता का चुनाव नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला चुनाव भी माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बागियों को कौन-सी पार्टी कितनी मजबूती से अपने पक्ष में ला पाती है और उनका कितना असर चुनावी मैदान में दिखाई देता है।
कल शाम तक नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही नाथद्वारा की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
