नई दिल्ली(पवन पुजारी)
पेपर लीक के मामले पर देशभर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर युवाओं का प्रदर्शन चल रहा है. पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस्तीफ़े की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की.
वहीं इस प्रदर्शन में शुरुआत से छात्र संगठन जुड़े हुए हैं. वो भले मंच पर अनशन पर नहीं बैठे लेकिन मंच के किनारे अनशन पर बैठे रहे. ऑल इंडिया स्टूडेंट असोसिएशन यानी आइसा जो सीपीआई (एमएल) की छात्र शाखा है, इसके तीन छात्रों ने 23 दिनों तक अनशन किया.
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया है कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को भेजा है, हालांकि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार होना बाक़ी है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताक़तें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य क़ानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फ़ोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.”
दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि “हमने कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.”
अभिजीत दीपके ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है. यह इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं, अगर आप इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो आप किसी से भी इस्तीफ़ा दिलवा सकते हैं. लोकतंत्र में डरने की ज़रूरत नहीं है.”
इससे पहले कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल भी उनके इस्तीफ़े की मांग पर अड़े थे.
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