सरकारी धन से खरीदे कचरा पात्र बेकार पड़े, सफाई व्यवस्था नदारद; ग्रामीणों ने उठाए सवाल
जयपुर-सीकर (पवन पुजारी)।
राजस्थान में करीब दो वर्ष के अंतराल के बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हो रहे हैं। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों एवं जिला परिषदों के चुनावी माहौल के बीच दो चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है। वहीं, तीसरे चरण में पंचायत समिति एवं जिला परिषद सदस्यों के लिए मतदान हो रहा है। आगामी 5 नवंबर को तीसरे चरण में सरपंच पदों के लिए मतदान प्रस्तावित है।
इसी चुनावी माहौल में हमारी टीम दातारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों की जमीनी हकीकत जानने निकली। दातारामगढ़ क्षेत्र लंबे समय से जाट राजनीति के प्रभाव और नारायण सिंह चौधरी परिवार के राजनीतिक दबदबे के लिए जाना जाता है। यहां भारतीय जनता पार्टी आज तक विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाई है। लेकिन राजनीतिक वर्चस्व की इस कहानी के बीच गांवों के विकास की वास्तविक तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है।
खंडेलसर ग्राम पंचायत पहुंचने पर विकास के दावों की जमीनी हकीकत सामने आई।
ग्राम पंचायत भवन की स्थिति और आसपास की व्यवस्थाएं कई सवाल खड़े करती हैं। सरकारी धन से खरीदे गए कचरा पात्र गांव में जगह-जगह पड़े दिखाई दिए। इन कचरा पात्रों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। कहीं वे सड़क किनारे पड़े हैं तो कहीं उनके आसपास कचरा बिखरा हुआ है।
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान झाबर जी भामू और भंवर जी भामू ने बताया कि गांव में नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था तक नहीं है। कचरा उठाने वाली गाड़ी का नियमित आना तो दूर, कभी-कभार बिल बनाने के समय गाड़ी बस स्टैंड तक आती है और औपचारिकता पूरी करके वापस चली जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव में कचरा संग्रहण की नियमित व्यवस्था ही नहीं है, तो सरकारी धन से खरीदे गए कचरा पात्रों का आखिर क्या उपयोग? इनकी खरीद पर खर्च हुई राशि और इनके रखरखाव को लेकर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अब सरपंच चुनाव पर टिकी निगाहें
खंडेलसर ग्राम पंचायत में आगामी सरपंच चुनाव को लेकर भी मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। फिलहाल चुनावी मैदान में तीन प्रत्याशियों के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें वर्तमान सरपंच ओमप्रकाश भांभू के परिवार से श्रीमती अणची देवी, युवा प्रत्याशी सरिता और विमला चुनावी मैदान में हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांव के मतदाता इस बार किस आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनेंगे?
ग्रामीणों से हमारी अपील है कि मतदान से पहले अपने गांव की स्थिति का आकलन जरूर करें। सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, कचरा संग्रहण और अन्य मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही अपना मत दें। चुनाव के समय किए जाने वाले वादों से अधिक महत्वपूर्ण पिछले कार्यों का मूल्यांकन है।
गांव का विकास किसी जाति, परिवार या राजनीतिक प्रभाव का मोहताज नहीं होना चाहिए। जनता को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद भी गांव के बीच रहे और समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारी निभाए।
लोक उजाला और माईनेता की टीम राजस्थान की ग्राम पंचायतों की ऐसी ही जमीनी तस्वीर लगातार आपके सामने लाती रहेगी। हमारा प्रयास है कि चुनावी चर्चाओं के साथ गांवों के वास्तविक मुद्दों और जनसमस्याओं को भी प्रमुखता मिले।
