नगर निगम उदयपुर
उदयपुर। नगर निगम उदयपुर चुनाव 2026 इस बार सिर्फ शहर की सरकार चुनने का चुनाव नहीं है, बल्कि इसे गुलाबचंद कटारिया के राज्यपाल बनने के बाद उदयपुर भाजपा की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
कटारिया के संवैधानिक पद पर जाने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की है कि उदयपुर की जनता और भाजपा का मजबूत कार्यकर्ता आधार आज भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा है।
भाजपा में मेयर की कुर्सी को लेकर अंदरूनी रस्साकशी
भाजपा के भीतर मेयर पद को लेकर अलग-अलग दावेदारियों और समीकरणों की चर्चा है। हालांकि पार्टी ने राजेंद्र राठौड़ जैसे अनुभवी नेता को चुनाव प्रभारी बनाकर कहीं न कहीं इस अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने की कोशिश की है।
बाहर से पार्टी भले ही एकजुट दिखाई दे, लेकिन वार्ड स्तर पर टिकट और स्थानीय प्रभाव को लेकर अंदरूनी रस्साकशी चुनावी मैदान में दिखाई दे सकती है।
अतुल छिंडोलिया, प्रमोद सांभर, दिनेश भट्ट और पारस सिंहवी जैसे नामों पर भी राजनीतिक गलियारों में नजर बनी हुई है।
⭐ अलका मोंडड़ा भी रहेंगी खास चर्चा में
भाजपा की महिला राजनीति में अलका मोंडड़ा एक महत्वपूर्ण चेहरा मानी जाती हैं। पार्टी के भीतर अपनी मजबूत पकड़ और प्रभाव के कारण इस नगर निगम चुनाव में उनकी भूमिका भी खास तौर पर महत्वपूर्ण रहने वाली है।
उनके सामने भी अपने राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ को चुनावी स्तर पर साबित करने की चुनौती होगी। अलका मोंडड़ा का प्रदर्शन और चुनाव में उनकी सक्रियता भाजपा की अंदरूनी राजनीति में उनके कद को और मजबूत करने वाली साबित हो सकती है।
ताराचंद जैन के लिए भी बड़ी अग्निपरीक्षा
विधायक बनने के बाद ताराचंद जैन के लिए यह नगर निगम चुनाव एक महत्वपूर्ण कसौटी माना जा रहा है। भाजपा कितने वार्डों में जीत हासिल करती है और शहर में संगठन कितना मजबूत प्रदर्शन करता है, इसका सीधा असर उनके राजनीतिक प्रभाव पर पड़ेगा।
नगर निगम चुनाव का परिणाम ताराचंद जैन के वर्तमान राजनीतिक प्रभाव के साथ-साथ उनके भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।
कांग्रेस के पास बड़े चेहरे की कमी?
दूसरी ओर कांग्रेस की कमान शहर में फतेह सिंह राठौड़ और ग्रामीण क्षेत्र में रघुवीर मीणा संभाल रहे हैं। संगठन की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे बड़े और प्रभावशाली स्थानीय चेहरों की है, जो पूरे उदयपुर में भाजपा के मजबूत संगठन को सीधी चुनौती दे सकें।
वहीं भाजपा के पास गजपाल सिंह, रविंद्र श्रीमाली, ताराचंद जैन, राजेंद्र राठौड़ सहित अनुभवी नेताओं और संगठनात्मक चेहरों की टीम मौजूद है।
कटारिया के बाद भाजपा की ताकत का लिटमस टेस्ट
इसलिए उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मेयर कौन बनेगा?
सवाल यह भी है कि गुलाबचंद कटारिया के संवैधानिक पद पर जाने के बाद क्या उदयपुर भाजपा अपना राजनीतिक प्रभाव बरकरार रख पाएगी?
कांग्रेस क्या भाजपा के इस मजबूत संगठन को चुनौती दे पाएगी?
भाजपा के भीतर चल रही मेयर की दौड़ कितनी शांत रहती है?
ताराचंद जैन और अलका मोंडड़ा जैसे नेताओं का राजनीतिक कद कितना बढ़ता है?
इन तमाम सवालों के जवाब नगर निगम चुनाव के नतीजों के साथ सामने आएंगे।
उदयपुर का यह चुनाव शहर की सरकार के साथ-साथ भाजपा और कांग्रेस—दोनों के लिए आने वाले वर्षों की राजनीति का ट्रेलर साबित हो सकता है।
नगर निगम उदयपुर चुनाव 2026: कटारिया के बाद पहली बड़ी परीक्षा, कांग्रेस के चेहरे का संकट
