राजसमंद, रात 1:23 बजे।
इस वक्त राजसमंद से आगे का नज़ारा बेहद चिंताजनक और भावुक करने वाला है। राजस्थान ही नहीं, गुजरात और मध्यप्रदेश से हजारों श्रद्धालु मोटरसाइकिलों पर परिवार सहित बाबा रामदेव के दर्शन के लिए रामदेवरा की ओर बढ़ रहे हैं। कई परिवारों में दो, तीन और चार लोग एक ही मोटरसाइकिल पर सफर कर रहे हैं। कई श्रद्धालु सड़क किनारे ही रात गुजारने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल है—इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद सरकारी स्तर पर मेडिकल कैंप, पीने के पानी और यातायात-सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्थाएँ कहाँ हैं?
सड़क किनारे जो भंडारे और पानी की व्यवस्थाएँ दिखाई दे रही हैं, उनमें बड़ी भूमिका निजी संस्थाओं और समाजसेवियों की है। श्रद्धालु अपनी आस्था के बल पर सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात—तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। धर्म और आस्था भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब धर्म और धार्मिक आस्था के नाम पर राजनीति हो सकती है, तो इन्हीं श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए सरकारें आगे क्यों नहीं आतीं?
राजसमंद से आगे देसूरी की नाल का रास्ता पहाड़ी और कई जगह बेहद चुनौतीपूर्ण है। रात के अंधेरे में हजारों मोटरसाइकिलों का गुजरना अपने आप में बड़े सुरक्षा जोखिम की ओर इशारा करता है।
क्षेत्र में भाजपा के कई जनप्रतिनिधि हैं—राजसमंद, नाथद्वारा, कुंभलगढ़ और उदयपुर ग्रामीण तक पूरा मार्ग राजनीतिक रूप से भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के लिए सरकारी स्तर पर दिखाई देने वाली व्यवस्थाएँ सवाल खड़े करती हैं।
हाँ, यह सवाल सिर्फ भाजपा से नहीं है। अगर पिछली सरकारों के समय भी ऐसी व्यवस्थाएँ नहीं थीं, तो क्या जनता ने सरकारें बदलकर यह उम्मीद नहीं की थी कि धार्मिक यात्राओं और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था होगी?
क्योंकि यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु करोड़पति या बड़े कारोबारी नहीं हैं। इनमें बड़ी संख्या मजदूर, गरीब, निम्न-मध्यम वर्ग और मेहनतकश परिवारों की है, जो पूरे साल मेहनत करने के बाद परिवार के साथ बाबा रामदेव के दर्शन की तैयारी करते हैं।
वे आस्था लेकर निकले हैं, अपने परिवार और देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना लेकर निकले हैं।
सवाल सीधा है—क्या धर्म सिर्फ चुनावी भाषणों और वोटों तक सीमित रहना चाहिए, या धर्मस्थलों तक जाने वाले इन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए?
यह सवाल किसी एक दल का नहीं, हर उस राजनीतिक दल का है जो धर्म और आस्था की बात करता है।
हम सवाल पूछेंगे।
हम जमीन पर उतरकर सच दिखाएंगे।
ऐसे ही ज्वलंत मुद्दों के लिए बने रहिए हमारे साथ।
राजसमंद से रामदेवरा तक आस्था का सैलाब… लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाएँ कहाँ?
