राजसमंद। नाथद्वारा नगर पालिका चुनाव भले ही आकार में छोटा चुनाव हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने राजसमंद लोकसभा क्षेत्र की सीमाओं से कहीं आगे तक जाते दिखाई दे रहे हैं। इस चुनाव पर इसलिए भी नजर है क्योंकि यहां पहली बार नगर निकाय के चुनावी समीकरणों के जरिए विश्वराज सिंह मेवाड़ की जमीनी राजनीतिक पकड़ का आकलन होगा।
2023 के विधानसभा चुनाव में विश्वराज सिंह मेवाड़ ने नाथद्वारा से कांग्रेस के दिग्गज नेता सी.पी. जोशी को हराकर अपनी राजनीतिक पारी की मजबूत शुरुआत की थी। � अब नगर पालिका चुनाव उनके लिए अलग तरह की परीक्षा है—क्या उनकी पकड़ केवल विधानसभा के पार्टी टिकट और व्यापक चुनावी समीकरणों तक सीमित है, या स्थानीय स्तर पर भी उनका मजबूत संगठन और जनाधार तैयार हो चुका है?
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दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सी.पी. जोशी के सामने भी अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत रखने की चुनौती है। वहीं देवकी नंदन गुर्जर द्वारा अपने पुत्र को स्थानीय राजनीति में स्थापित करने की कोशिश भी इस चुनाव के समीकरणों को दिलचस्प बना रही है।
असली लड़ाई टिकट से आगे—संगठन और व्यक्तिगत पकड़ की
नगर पालिका चुनाव में विधानसभा और लोकसभा की तुलना में समीकरण काफी अलग होते हैं। यहां प्रत्याशी का व्यक्तिगत संपर्क, वार्ड स्तर का संगठन, स्थानीय नाराजगी और निर्दलीय उम्मीदवार बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बागियों और असंतुष्ट दावेदारों को संभालने की है। जिस पार्टी के बागी अधिक वोट काटेंगे, उसके लिए यह चुनाव मुश्किल हो सकता है।
मेवाड़ परिवार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नाथद्वारा?
विश्वराज सिंह मेवाड़ की विधानसभा जीत के बाद उनकी पत्नी महिमा कुमारी मेवाड़ ने 2024 के लोकसभा चुनाव में राजसमंद से बड़ी जीत दर्ज की। राजसमंद लोकसभा क्षेत्र में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने कांग्रेस के दामोदर गुर्जर को 3,92,223 मतों के अंतर से हराया। �
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इस पृष्ठभूमि में नाथद्वारा नगरपालिका का परिणाम मेवाड़ परिवार की स्थानीय राजनीतिक स्वीकार्यता को लेकर एक और संकेत देगा। सवाल यह नहीं होगा कि भाजपा जीती या कांग्रेस—सवाल यह भी होगा कि किसके पक्ष में स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ ज्यादा मजबूत दिखाई देती है।
नाथद्वारा नगरपालिका चुनाव: मेवाड़ परिवार की राजनीतिक पकड़ की अग्निपरीक्षा,
