नई दिल्ली
जहां पर पेपर लिखकर मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी केंद्र सरकार को धर्मेंद्र प्रधान को घेर रखा है और अब सिर्फ जंतर मंतर आंदोलन नहीं रहकर के पूरे देश में आंदोलन फैल चुका है उसी कड़ी में कई ऐसी शख्सियत जो युवाओं की बात को बुलंद करते थे उन्हें में राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट जो अपनी ही सरकार के खिलाफ अजमेर से जयपुर तक की पदयात्रा की राजस्थान की आरपीएससी भंग करने की और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ विरोध का बिगुल बजा दिया था वह आज कांग्रेस के चाहे दिल्ली में राहुल गांधी जैसे नेता प्रियंका गांधी सड़क पर बैठे रहे हैं धरना दे रहे हैं पुलिस उठा रही है वहां पर भी मौजूद नहीं थे और राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस द्वारा किए जा रहे कार्यक्रमों में धर्म में भी नहीं दिखाई दे रहे हैं इसका मतलब क्या समझा जाए क्या सचिन पायलट का राजस्थान की राजनीति से मोह भंग हो चुका है या फिर अशोक गहलोत युग एक बार फिर लौटने वाला है क्योंकि अब तो सचिन पायलट को लेकर के मेंस भी वायरल होने लग गए हैं यह छुट्टी कहीं आने वाले समय में सचिन पायलट का 2028 में राजस्थान में राजस्थान नहीं रोक दे राजनीतिक लेकिन जैसा कि हमारे वरिष्ठ साथी राजस्थान की राजनीति को लेकर के कहते हैं कि पायलट परिवार कभी भी एक सीट के नेता नहीं है जैसा कि अशोक गहलोत सरदारपुर विधानसभा से और वसुंधरा राजे झालरापाटन से सचिन पायलट अपने लिए कोई इजी सीट ढूंढने में व्यस्त है लेकिन कितना भी इजी सेट ढूंढने युवाओं को लेकर के और कांग्रेस को लेकर के मुख्य नहीं होंगे तो आने वाला समय सचिन पायलट के लिए गंभीर होगा
देश में युवाओं का आंदोलन परवान पर और सचिन पायलट कांग्रेस के कार्यक्रमों से गायब
