राजस्थान की सतरंगी संस्कृति का अनोखा संगम इन दोनों बीकानेर में देखने को मिला l
आज इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल 2026 का भव्य समापन 2027 में पुणे मिलने के वादे के साथ संपन्न हुआ
9 से 11 जनवरी तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट की शान के साथ-साथ राजस्थानी परंपराओं लोक संस्कृति एवं रंग-बिरंगे आयोजनों की झलक देखने को मिली l जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित फेस्टिवल में सजे धजे ऊंट रॉबली मूंछ और दाढ़ियों वाले युवक एवं पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं का विदेशी पर्यटकों में खास उत्साह रहा l राजस्थान के पुष्कर मेले बीकानेर इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल जैसे आयोजन राजस्थान की पारंपरिक पहचान को बनाने में आज भी उतने ही कारगर है देश एवं विदेश से आए हुए पर्यटक राजस्थान की संस्कृति एवं यहां की परंपरा व्यंजन आदि का आनंद लेते हैं तो उनके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव एवं पधारो म्हारे देश की पंक्तियां पर्यटकों को पुन आने पर मजबूर कर ही देती है पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन सफल आयोजन के लिए धन्यवाद का पात्र है l
3 दिन तक चले कैमल फेस्टिवल का समापन रायसरनगर में हुआ इसमें मटका दौड़ रास्ता कबड्डी महिला एवं पुरुष देसी वह विदेशी पर्यटकों के बीच रस्सा कशी देसी वह विदेशी पर्यटकों के बीच कुश्ती मटका दौड़ के बाद अग्नि नृत्य देख लोगों हमने दांतो तले उंगलियां दबाली रेत के धोरों में देसी व विदेशी पर्यटकों ने जमकर फोटोग्राफी की एवं राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण को निहारा ऐसे आयोजन राजस्थान की संस्कृति एवं सभ्यता के लिए आयोजित होते रहने चाहिए
रेत ने पहना उत्सव का ताज! कैमल फेस्टिवल में दिखी रॉयल राजस्थान की शान
